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अन्नदानं परं दानं विद्या दानं अतः परम् |

अन्नदानं परं दानं विद्या दानं अतः परम् |

अन्नेन क्षणिका तृप्तिः यावज्जीवं च विद्ययो ||




Serving food to the needy is a charity of high order and so also is teaching someone (free of charge). However, whereas food gives momentary satisfaction to the recipient, the satisfaction of becoming learned remains with the recipient throughout his lifetime.


भूखे को भोजन एवं अज्ञानी को ज्ञान देना दोनों ही परम दान एवं पुण्य की श्रेणी में आते हैं। किन्तु भोजन छणिक संतुष्टि प्रदान करता है मगर ज्ञान उमर भर के लिए संतुष्टि देता है।


🙏Suprabhat Jai Bharat Vandemataram🙏

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